जहाँ चाह वहाँ राह

ये एक कहानी नही बल्कि एक हकीकत है जो हम रोजमर्रे की जिंदगी में अक्सर देखते हैं। उन सब बातों पर आधारित ये लेख है।

ये तब की बात है जब मैं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में Graduation कर रहा था। मैं जिस mess में खाना खाता था उसमें 4-5 बच्चे जो 15 वर्ष से 18 वर्ष तक के रहे होंगे काम करते थे। अभी भी करते हैं। ये सभी लड़के खाना परोसते हैं।

तो मैं जिस मेस में खाता था उसमें सत्यम, लालू, राम बाबू, सूरज नाम के चार लड़के काम करते थे। जिसमें लालू जो एक बदमाश कह सकते हैं या शरारती टाइप का लड़का था। और सत्यम बिल्कुल शांत और और अपने काम में 100% देने वाले लड़के।

कभी कभी जब खाना देने में देर हो जाती थी तो लड़के गुस्साते थे मैं भी एक- दो बार गुस्साया हूँ।

एक दिन की बात है मैंने सत्यम से पूछा तुम पढ़ाई क्यों नही करते ?
तो सत्यम का जवाब था, पैसा नही है तो कैसे पढें?

फिर मुझे उसके बारे में जानने की इच्छा हुई ।

तो मैंने एक दिन उससे पूछा क्या तुम्हारे माँ-पापा पढ़ाना नही चाहते ??

तो सत्यम ने कहा वो नही हैं,
इसलिए काम करता हूँ।

तो मैंने पूछा पढ़ना चाहते हो?
सत्यम ने कहा हाँ, लेकिन मुझे कौन पढ़ाएगा।

मैंने उसे कहा कि तुम जो यहाँ कमाते हो उससे पढ़ो, किसी स्कूल में नाम लिखा लो, और रात में काम करना 2 घंटे, दिन में स्कूल करना।

फिर उसे मेस के महाराज ने आवाज लगाई तो वो चला फिर मैं इसी सब बारे में सोचने लगा।

एग्जाम के बाद जब हॉस्टल खुला तो फिर मेस में खाना खाने लगे। पर मेरी नजर सत्यम को ढूंढ रही थी। जो मुझे कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। लगभग 10-15 दिन बीत गए लेकिन उसे नही देखने पर मैंने लालू से पूछा कि सत्यम नही दिखाई दे रहा है, कहाँ है वो ?

लालू बोला उ त पैसा वाला स्कूल में पढ़े लागल हुअ..

मैंने पूछा पैसा कौन दे रहा पढ़ने के लिए ??
तो लालू बोला वो 3 साल से पैसा जमा किया था , बहुत महंगा मोबाइल और कपड़े सब खरीदने के लिए। लेकिन पता नही उसने स्कूल में नाम लिखा लिया। अब सत्यम स्कूल जाता है।

मैं अब लालू की बात पर ध्यान ना देकर सत्यम के बारे में सोचने लगा।

शायद उसे चाहत थी पढ़ने की, पर उसे किसी ने कहा नही था कि पढ़ना जरूरी है।

फिर कुछ दिन पहले मैं लंका पर रविवार के दिन उसे देखा, तो उससे पूछा कि सुने हैं तुम Private School में Admission करवाये हो?
तो सत्यम बोला हाँ भैया, जब आप उसदिन कहे थे कि पैसा जो कमाते हो उससे पढ़ो, और रात को थोड़ा देर काम कर लो मेस के time में। तो वही कर रहा हूँ। मैंने पूछा लेकिन तुम मेस में दिखाई नही पड़ते हो?
सत्यम बोला कि अभी 3 साल से जो रुपया जमा किये हैं उसे खत्म होने तक पढ़ लेता हूँ।

फिर मैंने कहा ठीक है, जाओ पढ़ाई करो।

मैं अपने जीवन ऐसा कुछ बहुत अच्छा नही किया हूँ , जिससे लगे कि मैंने कुछ किया है । पर जब उसने कहा कि आपने कहा पढ़ने के लिए तो मैंने पढ़ना शुरू कर दिया। मुझे उस समय लगा कि मैंने आज कुछ अच्छा किया है। इस बात से मुझे खुशी मिली।

चाय दुकान, ढाबा, हर जगह यही छोटे बच्चे देखने को मिल जाते हैं। अक्सर हम उससे थोड़ा अभद्रता से पेश आते हैं।हम उसकी परिस्थितियों से वाकिफ नही होते हैं। उसके साथ दुर्व्यवहार करते हैं। ऐसा नही करें ।

क्या पता आपके एक अच्छा सलाह उसे महान व्यक्ति बना दे, या आपका दुर्व्यवहार उसे गलत व्यक्ति।

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संसार दुःखों से भरा है।

यह ब्लॉग मैंने दुःख पर लिखा है। इसके बारे में जब मैंने study किया तो पता चला कि दुःख क्या है? दुःख क्यों है ?

जब हम किसी सुखी व्यक्ति को ज्ञान देते हैं तो वो कहते है कि मुझे ज्ञान ना दो।

लेकिन जब हम किसी दुःखी व्यक्ति के पास जाते हैं उससे पूछते हैं कि दुःखी क्यों हो तो वो रोने लगता है या निराशा प्रकट करता है।

तब हम उससे कहते हैं ये संसार दुःखों से भरा है।

तो वह पूछता है कैसे ?

इसका जवाब आगे निम्नलिखित है।

● संसार मे 4 Universal Truth है। जिसे कोई टाल नही सकता है।

1- अगर संसार मे आए हैं तो दुःख होगा। जन्म भी दुःख है, मृत्यु भी दुःख है, किसी इच्छित वस्तुओं का प्राप्त ना होना भी दुःख है, कोई अप्रिय मिलन भी दुःख है। मान लिया किसी विवाह अपरिचित से हो जाती है जिसे दोनों नही चाहता हो, तो वे दोनों अपने दाम्पत्य जीवन सुखी से निर्वाह नही कर सकते। ये दुःख है।

2- अगर दुःख है तो दुःख का कारण भी होगा। अगर कोई कार्य होता है तो उसका कारण भी होता है। हमारे दुःख का सबसे बड़ा कारण है हमारे मन मे होने वाली असीमित इच्छा।

3- अगर दुःख का कारण है तो दुःख का निवारण भी है।अपने इच्छाओं का त्याग करना।

4- हमें जिंदगी में कोई दुःख ना हो, इसके लिए आठ मार्ग है। जिसपर चलने से दुःख नही होगा।

(a..) सम्यक दृष्टि (Right Vision) – संसार मे सब अच्छे हैं, कोई बहुत अच्छे तो कोई कम अच्छे। किसी भी व्यक्ति से उसकी अच्छाई को लें।

(b..) सम्यक वचन (Right Speech) – ऐसा बोलें की लोग आपके तरफ आकर्षित हो, आपकी बातों को सुनें। ऐसा तब हो होगा जब आप सदा सत्य बोलेंगे।

(c..) सम्यक कर्म (Right Action) – ऐसा काम करें जिससे समाज को लाभ भी हो और खुद को हानि भी ना हो।

(d..) सम्यक संकल्प (Right Oath) – किसी को गलत वचन देकर उसके आँखों में आँसू ना आने दे। ऐसा वचन ना दे जो पूरा न हो सके।

(e..)सम्यक निर्वाह (Right Livelihood)- जीवन जीने के लिए ऐसा काम करो कि लोग आशीष दे , वद्दुआ ना दे। शराब ना पिएं, ना बेचें। गलत धंधा करने वाले के पास ना जाएँ।

(f..) सम्यक व्यायाम (Right Exercise ) – इसका मतलब है कि अपने दिमाग का व्यायाम करना है। दिनभर में जितनी भी बातें हुई है आपके साथ, वह दो तरह के होंगे, अच्छी या बुरी। अच्छी बातों को याद रखें।

(g..) सम्यक स्मृति (Right Memory)- उपरोक्त बातें करने से आपकी यादास्त शक्ति में वृद्धि होगी। क्योंकि हमने पहले ही बुराई को भुला दिया है।

(h..) Right Meditation :- जब हम सोने जाते हैं तब दिनभर में हुए प्रत्येक Activity को Serially याद करने की कोशिश करें। अगर आप ऐसा नही कर पाते हैं तो समझिए कि आपका ज्ञान Corrupt है। इसे धीरे धीरे सही करें।

उपरोक्त बातें बौद्ध धर्म का अध्ययन करते समय मिला है।

कविता

याद आता है वो पहला दिन
जब देखा था मैंने तुम्हें,

हालांकि वो दिन बीते
आज जमाना हो गया,

देखते ही देखते उस दिन
नजर तेरा कातिलाना हो गया ,

जो कभी ड़रता था
मोहब्बत के चक्कर से ,

तेरी पहली नजर में ही
तेरा दीवाना हो गया ,

नोक झोंक से बढा ये प्यार
आज फिर नोक झोंक पर आ टिका है।

अब हर रोज जो ये चलता
बहस का सिलसिला है।

लगता नही बिल्कुल भी
ये वही प्यार है,

आता है वो दिन जेहन में,

जिस दिन तूम नहीं आती क्लास में,

लगता था मेरे चैन सुकून का,
एक अरसे बाद कहि ठिकाना हो गया,

तेरे पास ना होने के एहसास से
लगता था कि बरसो का याराना खो गया,

की तुम्हे अपना बनाने की चाहत ने
मुझे क्या से क्या कर दिया,

आज दूर जाने की बात करके

तुमने ही मुझे तबाह कर दिया
इस धोखे की दुनिया मे भी
मैंने जो सच्चा प्यार किया,
अब क्या करूँ, अब क्या कहूँ
इस प्यार ने ही, जीना मेरा दुश्वार किया..
सुनो,की अब मेरी दुनिया मे
यादों का मेला है
तुम जब चाहो तुम वापस आना
मुझे आजीवन रहना अकेला है,

कविता

*जब दोस्तों के बीच मेरी मोहब्बत का मजाक उड़ता है , और वो कहते हैं इतना बदनसीब इस दुनिया मे शायद ही किसी का इश्क होगा*

*तो अब मेरा जवाब सुनिए आपलोग*

और जवाब सुनकर शायद ही इस महफ़िल में कोई आंख होगी जिससे जमीन पर कोई अश्क न गिरेगी।

तो क्या हुआ मैं उसे एक नजर देख भी नही पाया
उसकी तस्वीर के अलावा कोई और नजारा मेरी आँखों को नही भाया

तो क्या मैं उससे एक बार मिल भी नही पाया
उससे मिलने की आरजू में जो सुकून था वो किसी और में न आया ।

तो क्या उसके हाथों में अपने हाथ रख कर मैंने अपने साथ नही घुमाया
उसके हाथ के लिए ही तो उसकी हर खुशी को मैंने खुशी से लुटाया।

तो क्या हुआ उसके कंधे पे सिर रख कर मैंने अपना गम उससे नही बंटाया,
ख्वाबों में आकर हर रात उसने मुझे खूब सताया ।

तो क्या हुआ मैंने उसके साथ बैठकर नही खाया,
खाली पेट जब रातों में तड़प कर सोया, तो उस तड़प में वही एक शख्श याद आया ।

तो क्या हुआ मैंने उसे प्यार से किसी नाम से नही बुला पाया,
उसका नाम लेते ही , मेरा चेहरा आँशु होते हुए भी मुस्कुराया ।

तो क्या हुआ जिंदगी के सफर में चलने के लिए वो शख्स आज मेरे साथ नही आया,
जब जब हिम्मत हारी तो उसे पाने की चाहत ने हर मुश्किल को आसान बनाया ।

तो क्या हुआ जिसे दिल से चाहा वो कभी मेरे करीब न आया,
उसे पाने की चाहत में मैंने बस उसे छोड़ बाकी सबकुछ है पाया ।

*एक बात बिल्कुल सच है दोस्तों*

एक दिन मेरे पास सबकुछ होगा, लेकिन वो नही होगी जिसके किए सबकुछ होगा ।

अपने हर दर्द को मुस्कान में छिपा कर मैंने किसी को नही दिखाया,
कभी तन्हाई में शाम को आकर मिलना, देखना मैंने आँशुओं को ताकत कैसे बनाया ।

तो क्या हुआ आज भी किसी वजह से नफरत है उन्हें हमसे,
तो क्या हुआ किसी बात से खफा हैं वो हमसे, जो दिल की आवाज को सुनना चाहते हो तो करीब आओ

धड़कन चीख चीख कर कह देगी, की हमे आज भी उनसे प्यार है ।

शुक्रिया दोस्तों

तर्ज :- ये दिल तुम्हारे प्यार के मारा है दोस्तो

किसी को दे दिया कोटा,
किसी को दे दिया लोटा,
अगर माजी सटकली तो,
दबा दूँ ना कहीं नोटा…..

👉जिसने दिया था वोट उसी को भुला दिया,
बाबा बना के अपने ठुल्लू थमा दिया,
अपना तो भाजपा से किनारा है दोस्तों,
अब हमको रामजी का सहारा है दोस्तों।

👉माया के वोटरों को रिझाने में लग गए,
तुम अल्पसंख्यकों को पटाने में लग गए,
और पेटेंट वोटरों को नकारा है दोस्तों,
अपना तो रामजी का सहारा है दोस्तों।

👉हालत ऐसी जैसे जल बिन मछली,
कार्यकर्ताओं की तो और भी है पतली,
इतनी सी कहानी है हमारे नसीब की,
वोटर है भाजपा के या जोरू गरीब की।

जिसका पति अखण्ड कुंवारा है दोस्तों,
हमको तो रामजी का सहारा है दोस्तों।

👉जिसका नही था वक्त वो कमबख्त कह रहा,
कोई हमें अंधा तो कोई भक्त कह रहा,
भक्ति का सारा भूत उतारा है दोस्तों,
अब हमको रामजी का सहारा है दोस्तों।

😂😂

“मेरा भगीना आशीष”

“आशीष” मेरे दिल का टुकड़ा,

मैं समझता हूँ चाँद का टुकड़ा,

जब तुम मेरे गोद हो आते,

तब मेरा मन हो बहलाते।

नाना तो रखते हैं सिर पर,

मैं खेलाता दौड़ दौड़ कर,

जब तुम हँसते खिलते हो,

तब लगता गुल खिलता है।

तुम हो कल के देश का नाज,

करना ना हमको कभी निराश,

मम्मी पापा का रखना लाज,

कभी ना होने देना उन्हें निराश।

अभी तो हो तुम बहुत बच्चा,

आगे चलकर होना सच्चा,

मम्मी पापा की बात मानना,

समाज सेवा में हाथ बटाना।

अब लिखते लिखते गया थक,

सदा जीवन में बोलना सच,

ये हमसे करो तुम वादा,

ये सब तुम मान लो इरादा।

अब मामा का दिल ऊब चुका है,

तुम तो खूब ही सो चुका है,

अब मुझे दो तुम सोने को,

अब तुम्हें कभी नही रोने को।

तुम्हारा मामा

सुदेश कुमार मिश्रा

(11-1-1997)

पहला_प्यार

कहानी की शुरुआत होती है एक गांव से, जिसमे एक लड़के यानी कि मैं और एक लड़की यानी कि वो (उसके नाम के बदले मैं उसका नाम Dream रख देता हूँ) Dream रहती थी। बात आज से 10 साल पहले की है। लड़का 6 क्लास और लड़की भी। मैं और love एक साथ स्कूल जाते और आते। धीरे धीरे मैं उसकी तरफ आकर्षित होने लगा था।

प्यार नही था वो बस इतना कहूंगा कि उसके साथ खेलना और बातें करना अच्छा लगता था। उस समय तो प्यार का नाम बस फिल्मों में सुना था।

लड़का और लड़की क्लास 10th में पहुंचता है, फिर बोर्ड के एग्जाम में व्यस्तता के कारण एक दूसरे से मिलना कम हो जाता है। मैट्रिक परीक्षा के रिजल्ट 29 मई 2012 को आया था जिसमे लड़का स्कूल टॉप किया। शायद District भी।

अगर कोई अपने दोस्तों में अच्छा करता है तो दोस्त पार्टी जरूर लेता है। ठीक उसी तरह मुझसे भी पार्टी मांगी गई। 29 मई के रात में सब दोस्तों के साथ पार्टी किया। वही अपना बचपन वाला पार्टी।

जिसमें 3 लड़के और 4 लड़किया थी। सभी मेरे अच्छे दोस्त है। बस उस पार्टी में मेरी Dream नही थी इसका कारण ये था कि वो घर पर थी.. मैंने उसे कहा भी नही, मेरे पास उस समय अपना पर्सनल फोन नही था।

Dream मुझसे नाराज हो गई थी, उसका कारण और सब लड़कियों का मेरे दिए गए पार्टी में होना था। पर 30 मई को सुबह 7.22 मिनट ( मेरे डायरी के अनुसार ) मैं Love के घर पर गया, तो वो मुझसे बोली यहाँ से चले जाओ और मुझसे कभी बात मत करना। वो गुस्से में जरूर थी पर आंखों में आंसू भी ।

मैं उसे कहने लगा कि मैं तुम्हें सबसे ऊपर रखता हूँ , तुम मेरी सबसे बेस्ट फ्रेंड हो। मैं तुम्हें सबके साथ पार्टी में नही ले जाना चाहता , और मेरे पास फ़ोन नही था कि मैं तुम्हें कॉल कर देता। मैं तुम्हारे लिए स्पेशल पार्टी दूंगा, जिसमे मैं और तुम रहोगी।

पर वो उस समय कुछ सुनने वाली नही थी, अपने जिद पर अड़ी रही। बात नही करना है तुमसे.. जाओ यहाँ से.. बस इतना ही बोल रही थी।

फिर मुझे गुस्सा आने लगा, उस समय मैं कोई बहुत बड़ा समझदार नही था। मैंने भी गुस्सा में कह दिया अगर मैं आज यहाँ से चला गया तो फिर कभी नही आऊंगा। समझ लेना कि मैं अब नही हूँ। फिर मैं चला आया अपने घर। मैं थोड़ा ज़िद्दी टाइप का था।

कुछ दिनों बाद मैं 20 जून को दूसरे शहर जो कि उस राज्य की राजधानी थी वहां चला गया आगे की पढ़ाई करने..11th और 12th के साथ IIT JEE की तैयारी करने।

Dream भी मेरे साथ आने वाली थी मगर 30 मई के घटना के बाद वो मेरे साथ नही आकर किसी दूसरे शहर चली गई।
कुछ दिनों के बाद 29 जुलाई 2012 को मैंने कॉल करना चाहा, (मेरे पास अब पर्सनल नंबर था) लेकिन उसने अपना नंबर चेंज कर लिया था, पुराना नम्बर अपने घर पर ही छोड़ दी या बंद कर दी। फेसबुक पर मुझे ब्लॉक कर दी थी। बाद में वो fb का password मैं भूल गया था, तो मैंने दूसरी id बना ली जो अभी use करता हूँ। पहले वाला id (virat वाला ) का password याद आने के बाद वो account डिलीट कर दिया।

मैं समझ गया था कि वो मुझसे अब मतलब नही रखना चाहती है। मैंने भी अपना ध्यान पढ़ाई पर लगा दिया। 6 साल बीत गए ना कॉल , ना msg और ना ही एक दूसरे को देखा कभी। इसका कारण ये भी था कि मैं घर नही के बराबर जाता, बस दीपावली या होली। दुर्गा पूजा की छुट्टियों में वो घर आती थी इसलिए मैं नही जाता था। हालांकि पिछले 4 साल से मैं दीपावली में घर नही जा पाया हूँ।

बात अगस्त 5, 2018 की है एक कॉल आया मेरे नम्बर पर।

शाम के 7.38 मिनट पर। एक अनजान नम्बर से।

उधर से आवाज आया हेलो (और मेरा नाम) ,..
मेरा उत्तर था आप कौन?
फिर वो बताई अपना नाम.. मैंने कहा मैं तो नही पहचाना..

फिर जब वो Sorry उस दिन के लिए (30 मई 2012) के लिए बोली तब मैंने पहचाना। क्योकि 6 साल में आवाज भी नही सुने थे।

फिर मैंने कॉल करने का कारण पूछा तो बताई की वो मेरे घर पर गई थी। वैसे पहले हम दोनों एक दूसरे के घर पर जाते आते रहते थे। मेरे घर के सामने उसका घर है। मेरे घर पर उसने मेरे छोटे भाई से मेरा नम्बर ली। मेरा हाल पूछने के लिए।

पर शायद अब वो #मेरी Dream नही थी, 3 मिनट 31 सेकंड बात की मैंने।

उसमे एक भी बार हमारे पुराने यादों के चर्चा नहीं कि थी। बस वो अपने नए ज़िन्दगी के बारे में बोलती रही मैं hu hu hu hu. करके जवाब दिया। फिर मैंने उससे कहा कि बाद में कॉल करूँगा। फोन cut कर दिया। अभी तक मैंने कॉल नही किया।
सच कहूं तो अब मुझे लगता है कि मुझे उससे उस समय प्यार हो गया था..

पर क्या प्यार का मतलब सिर्फ उसे पाना ही जरूरी है??
वो शायद मेरे भाग्य में नही थी। 4 सितंबर की सुबह Dream ने मुझे msg किया। उस msg में लिखा था “I love u.. पर मैं इतने दिनों तक इसलिए तुमसे दूर रही कि तुम अच्छे से पढ़ाई करो, मैं जानती थी कि अगर मैं तुम्हारे साथ रहूंगी तो तुम पढ़ नही पाओगे , मैं तुम्हें सबसे आगे देखना चाहती थी और हूँ। इस 6 साल में तुम्हारे बारे में हर दिन तुम्हारे बारे में सोचती रही हूँ , (सच या झूठ मुझे पता नही कितना याद की है मुझे) सच कहूँ तो उस दिन (30 मई 2012) मेरी गलती थी। Sorry , But i really love you…”

6 साल हो गए, मुझे Dream से दूर हुए।

6 साल में मेरे लाइफ में कई परिवर्तन हुए। क्या मैं Dream का इंतजार करता ?? शायद नही, मेरे ज़िंदगी मे किसी और ने दस्तक दे दी थी। हालांकि 11 मई 2016 को उसने मुझे नाता तोड़ लिया। पर मैं अब किसी से प्यार नही करता। अगर Dream मेरी जिंदगी में आना भी चाहती है तो मैं उससे बदला हुआ मिलूंगा।

शायद अब मुझे उससे प्यार नही है। पर मैं उसे नही कह पाया हूं। मैंने msg का रिप्लाई नही किया। अब डर लगता है, मैं खुश हूं अपनी टूटती, बिलखती, और अपने मार्ग पर चलने वाली इस ज़िंदगी से। मैं अब प्यार से डरता हूँ, अपने कैरियर पर ध्यान देना चाहता हूँ। प्यार के लिए मुझे समय नही अब।

मुझे अब खुद के बारे में सोचने में अच्छा लगता है।

शायद ये ही मेरा पहला प्यार था।😰😰